ॠतु बसंत

ॠतु गोयल की मानवीय संवेदनाओं से जुडे ब्लाग में आप का स्वागत है

Tuesday, February 17, 2026

मुक्तक संस्कार

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खुशियों का सामान सज़ा कर रखते हैं। घर में कुछ मेहमान बुला कर रखते हैं। सभ्य हो रहे बच्चे दिन- ब- दिन ऐसे कि बूढ़े माँ- बाप छिपा कर रखते हैं। अ...

अग्रसेन महाराज

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तेरा हम वंदन करें,अग्रसेन महाराज। सारे जग में दिख रहें,तेरे पावन काज। इक रुपया इक ईट से,ऐसा बना समाज। आपस के सहयोग से,पूर्ण हुए सब काज। अग्र...

भारतीय लड़किया ज़िंदाबाद

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तुमने परचम लहराया। नहीं कम किसी से बतलाया। जीत-जीत कर हर पारी। कौशल अपना दिखलाया। कौन कहे तुम सबल नहीं। बेटों की भांति प्रबल नहीं। झंझावातों...

विदा हो ही जाओ ना

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तुमने अंतिम साँस लीं और मैं तुम्हें अपनी अंतिम साँस तक यूं याद करूं बेइंतहा ये कितना लाज़मी है मुझे नहीं मालूम तुम्हारे जीते जी तुमसे बिछोह ...

मेरी आँखें

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सुनो बहुत अधिक सच कहती हैं मेरी आँखें। पढ़ लोगे तो शर्मसार हो जाओगे। या फिर प्रेम,स्नेह,अपनत्व,ममत्व जो भी बचा है ना धरती पर मनुष्य होने के ल...
Sunday, February 1, 2026

गीत जाग हिंदू जाग

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जाग-जाग-जाग रे, अब तो जाग -जाग रे।  वक्त की पुकार है,निज हितों को त्याग रे। कब तलक तू आंखें मूंद, स्वप्न देखता रहेगा। स्वर्ग सी धरा को कोई, ...
Friday, January 23, 2026

सरस्वती वंदना

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हंस वाहिनी,ज्ञान दायिनी,तम हारिणी  तुमको प्रणाम। मां सुहासिनी, वीणा वादिनी,वर दायिनी तुमको प्रणाम। चौसठ कलाओं से सुशोभित कर रही हो ये धरा।  ...
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