Friday, January 23, 2026

सरस्वती वंदना

हंस वाहिनी,ज्ञान दायिनी,तम हारिणी 
तुमको प्रणाम।
मां सुहासिनी, वीणा वादिनी,वर दायिनी तुमको प्रणाम।

चौसठ कलाओं से सुशोभित कर रही हो ये धरा। 
सप्त सुरों में गूंजती हो जिन स्वरों को तुमने वरा। 
स्वर दायिनी, वीणा वादिनी, वर दायिनी तुमको प्रणाम।

ज्योर्तिमयी तुम ज्ञान से कलुषित मन को पखारती।
एक छंद हो सरस्वती शब्द बाण से तम काटती।
शब्द दायिनी, वीणा वादिनी, वर दायिनी तुमको प्रणाम।

विद्वान के माथे पे तुम तकदीर बन कर शोभती।
जड़मती होते सुजान तुम बंधनों को तोड़ती।
विद्या दायिनी, वीणा वादिनि, वर दायिनी तुमको प्रणाम।

                 ऋतु गोयल

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