Tuesday, May 25, 2021

मुक्तक

हर शख्स धरा पर तुमको,कद्रदान मिले।
तुम्हें तुम्हारे ख्वाबों का आसमान मिले।
खुशियों का अंबार सजे घर-बार तुम्हारे।
रब तुम पर ताउम्र सदा मेहरबान मिले।

Wednesday, April 7, 2021

मुक्तक

मैं अपने अश्कों की स्याही से ही हालात लिखती हूँ।
हरेक पीड़ा ओ बैचेनी, हरेक जज़्बात लिखती हूँ।
मैं जो बोलूं वो तुम समझो सदा ये हो नहीं सकता।
मैं मन के पन्नों पर ही इसलिए हर बात लिखती हूँ।

मुक्तक

वो कहता है कि मेरा है मगर, कुछ है जो खलता है।
मैं हंसती हूँ तो रोता है,मैं रोती हूँ तो हंसता है।
वो बातें भी बड़ी करता है, तालीमें भी अव्वल हैं।
मेरे दिल को न पढ़ पाया,मुझे वो अनपढ़ लगता है।

मुक्तक

अभी तक जो सुना हमने, अधिक ही अनसुना होगा।
यक़ीनन हम सभी के जाने कितने-कितने किस्से हैं।
कि यूं तो दिख रहे हैं हम समूचे सब ही बाहर से।
मगर भीतर ही, भीतर जाने, कितने-कितने हिस्से हैं।

Friday, October 16, 2020

बापू महात्मा गांधी

तुमको चरखा,खादी और स्वदेशी गीत सदा भाए।
तुम सत्य,अहिंसा, सादगी के साधक बन आए।
साबरमती के संत कहाए आज़ादी भी दिलवाई
तुम ही राष्ट्रपिता,महात्मा औ' बापू कहलाए।


बापू तेरा हर इक बंदर नेकी हमको सिखलाए।
कभी न देखे बुरा, न बोले बुरा, बुरा ना सुन पाए।
नोटों पर तस्वीर तेरी ये राह सत्य की दिखलाए।
फिर भी जाने क्यों जन-जन का चंचल मन भटका जाए।

Friday, October 2, 2020

मुक्तक स्वाभिमान

हरगिज़ दया किसी की गंवार नहीं मुझे
खुद संवरी हूँ किसी ने सँवारा नहीं मुझे
जब भी मेरी कश्ती किसी तूफान में डूबी
उसके सिवा किसी ने उबारा नहीं मुझे

मुक्तक देशभक्ति

वो लोग क्या जिये जो बस, अपने लिए जिये
एक-एक सांस हो हमारी, देश के लिए
है घोर तिमिर चारों तरफ मेरे साथियों
जलना भी पड़ा तो जलेंगे बनके हम दिए