Saturday, February 28, 2026

मुक्तक होली

तू महावर मेरा, मैं हूं रोली तेरी।
तू मेरा हास्य है, मैं ठिठोली तेरी।
तू है आंगन मेरा,मैं रंगोली तेरी।
तू मेरा फाग है और मैं होली तेरी।

तू ख़याल है तो, मैं भी खयाल हूं।
तू धमाल है जो, मैं वो धमाल हूं।
तू भी खुशहाल है,मैं भी खुशहाल हूं। तू कमाल है गर, मैं भी कमाल हू।

मेरी मंजिल है तू,तू ही रस्ता मेरा
आंख में जो सजा, वो है सपना मेरा
रास खेले बिरज की, धरा पर चले
राधिका मैं तेरी, तू है कान्हा मेरा
                        ऋतु गोयल

मुक्तक जिंदगी

 फूल है तो कभी, शूल है जिंदगी।
 है सही तो कभी, भूल है जिंदगी।
 जिंदगी के हरेक पल को जी ले जरा।
 सांस गर थम गई, धूल है जिंदगी।

Friday, February 27, 2026

मुक्तक बुजुर्ग

जिन्हें रिश्ते निभाने की कभी, आदत नहीं होती।
दिलों में जिनके हरगिज़ भी,यहां उल्फत नहीं होती।
किसी की खुशियों का एक पल भी जो, कारण न बन पाते।
हां उनकी जिंदगानी में कोई, रहमत नहीं होती।

वे कैसे लोग हैं ज़ख्मों पे जो मरहम नहीं करते।
छिड़कते है नमक और ग़म में भी, जो ग़म नहीं करते।
जिन्हें औरों के जज्बातो से, लेना, और न देना कुछ।
नहीं हो स्वार्थ तो रिश्ता कोई कायम नहीं करते।
              ऋतु गोयल

Tuesday, February 17, 2026

मुक्तक संस्कार

खुशियों का सामान सज़ा कर रखते हैं।
घर में कुछ मेहमान बुला कर रखते हैं।
सभ्य हो रहे बच्चे दिन- ब- दिन ऐसे
कि बूढ़े माँ- बाप छिपा कर रखते हैं।

अक्सर उन पलकों पर नमी देखी है।
खुशियाँ हैं फिर भी गमी देखी है।
सज संवर के भी उदास दिखते हैं वे।
जिन्होंने मां-बाप की कमी देखी है।
                    ऋतु गोयल

अग्रसेन महाराज

तेरा हम वंदन करें,अग्रसेन महाराज।
सारे जग में दिख रहें,तेरे पावन काज।

इक रुपया इक ईट से,ऐसा बना समाज।
आपस के सहयोग से,पूर्ण हुए सब काज।

अग्रोहा एक वृक्ष है,सबको देता छाँव
भले कहीं कोई रहे,वहीं सभी का गांव

अग्रोहा एक तीर्थ है, क्यूं सब जाते भूल।
कर्म स्थल महाराज का,शीश लगाओ धूल।

लक्ष्मी पूजन सब करें,त्याग भाव है पाठ।
दान,धान्य,व्यापार से,घर-घर में हैं ठाठ।

तुझसे ही पहचान है,हम तेरी संतान।
साढ़े सत्रह गौत्र की,है तुझसे ही शान।

एक पिटारा दान का,ऐसा बाँधा साथ।
खाली ये होगा नहीं,बांटो दोनों हाथ।

अपने-अपने हित करें,परहित कैसे होय।
वो हो परहित कर सकें,जो निजहित न रोय।
      ऋतु गोयल

भारतीय लड़किया ज़िंदाबाद

तुमने परचम लहराया।
नहीं कम किसी से बतलाया।
जीत-जीत कर हर पारी।
कौशल अपना दिखलाया।
कौन कहे तुम सबल नहीं।
बेटों की भांति प्रबल नहीं।
झंझावातों से लड़ने वाली।
तुम सिंहों से भिड़ने वाली।
शक्ति का तुम महापुंज हो।
हुंकारों का महागुंज हो।
जो कमतर तुमको आंक रहें।
जो हेय दृष्टि से बांच रहें।
उनको तुम बतलाती आईं।
औकात सदा दिखलाती आईं।
तुमने नभ को झुका दिया है।
 दुनिया को ये बता दिया है।
हर जंग में जितनी वाली हो।
देश हित में मिटने वाली हो।
तुम रोटी गोल भी बना रहीं।
गोल गेंद भी उड़ा रहीं।
तुम अस्त्र-शस्त्र में निपुण हो।
बिटिया तुम परिपूर्ण हो।
               ऋतु गोयल

विदा हो ही जाओ ना

तुमने अंतिम साँस लीं
और
मैं तुम्हें अपनी अंतिम साँस तक
यूं याद करूं बेइंतहा
ये कितना लाज़मी है
मुझे नहीं मालूम

तुम्हारे जीते जी तुमसे बिछोह
कभी सोचा न था।
अब तुम्हारे जाने के बाद
इतना तुम्हारा याद आना
बहुत कष्टकर है।
बस ये जानती हूँ।

वश चले तो
सारे रिश्ते,यादें,बातें
मिटा दूं अपने स्मृति पटल से
जैसे कभी हुए ही नहीं थे।

तुम विदा हो ही गये हों तो
विदा हो ही जाओ ना।
क्यों मेरे विदा होने का
कर रहे हो इंतजार।

मुझे नहीं देखना
कोई कारवां दिवंगत रिश्तों का।
जो छोड़ तो जाते हैं रोते हुए।
फिर जब-तब याद आते हैं
रुलाने के लिए।

आखिर क्यूँ 
होता है ये सब
क्यूं भूला देने को मनचाहा
कोई डिलीट का बटन
नहीं बना अब तक?
              ऋतु गोयल