वक्त की पुकार है,निज हितों को त्याग रे।
कब तलक तू आंखें मूंद, स्वप्न देखता रहेगा।
स्वर्ग सी इस धरा को, कोई लूटता रहेगा।
इस अंधेरी रात को, भोर का अनुराग दे।
जाग-जाग-जाग रे....
ये चोट मामूली नहीं,जमीर पे आघात है।
बात ये खुद की नहीं,मां भारती पे बात है।
आंख जो उन पर उठे,गोलियों से दाग़ रे।
जाग-जाग-जाग रे......
सैनिकों की भांति मन में, तू भी तो जुनून रख।
वे सरहदों पे हैं डटे, तू आस-पास सुकून रख।
छेड़ दे हर साज़ पर, देश का ही राग रे
जाग-जाग-जाग रे.....
केसरी अपना वसन,केशव ही आन-बान है।
ध्वज हमारा केसरी,ये ही हमारी शान है।
न झुका है, न झुकेगा,दिल में रख ये आग रे।
जाग-जाग-जाग रे......
गर लूट गया ये चमन,तो तितलियां भी सिसकेंगी।
खू से सन गई नदी,तो मछलियां भी तड़पेंगी।
जाग-जाग जा बचा,मां-बहनों का सुहाग रे।
जाग-जाग-जाग रे.......
ऋतु गोयल
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