Tuesday, February 17, 2026

विदा हो ही जाओ ना

तुमने अंतिम साँस लीं
और
मैं तुम्हें अपनी अंतिम साँस तक
यूं याद करूं बेइंतहा
ये कितना लाज़मी है
मुझे नहीं मालूम

तुम्हारे जीते जी तुमसे बिछोह
कभी सोचा न था।
अब तुम्हारे जाने के बाद
इतना तुम्हारा याद आना
बहुत कष्टकर है।
बस ये जानती हूँ।

वश चले तो
सारे रिश्ते,यादें,बातें
मिटा दूं अपने स्मृति पटल से
जैसे कभी हुए ही नहीं थे।

तुम विदा हो ही गये हों तो
विदा हो ही जाओ ना।
क्यों मेरे विदा होने का
कर रहे हो इंतजार।

मुझे नहीं देखना
कोई कारवां दिवंगत रिश्तों का।
जो छोड़ तो जाते हैं रोते हुए।
फिर जब-तब याद आते हैं
रुलाने के लिए।

आखिर क्यूँ 
होता है ये सब
क्यूं भूला देने को मनचाहा
कोई डिलीट का बटन
नहीं बना अब तक?
              ऋतु गोयल

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