Friday, February 27, 2026

मुक्तक बुजुर्ग

जिन्हें रिश्ते निभाने की कभी, आदत नहीं होती।
दिलों में जिनके हरगिज़ भी,यहां उल्फत नहीं होती।
किसी की खुशियों का एक पल भी जो, कारण न बन पाते।
हां उनकी जिंदगानी में कोई, रहमत नहीं होती।

वे कैसे लोग हैं ज़ख्मों पे जो मरहम नहीं करते।
छिड़कते है नमक और ग़म में भी, जो ग़म नहीं करते।
जिन्हें औरों के जज्बातो से, लेना, और न देना कुछ।
नहीं हो स्वार्थ तो रिश्ता कोई कायम नहीं करते।
              ऋतु गोयल

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