Tuesday, February 17, 2026

मुक्तक संस्कार

खुशियों का सामान सज़ा कर रखते हैं।
घर में कुछ मेहमान बुला कर रखते हैं।
सभ्य हो रहे बच्चे दिन- ब- दिन ऐसे
कि बूढ़े माँ- बाप छिपा कर रखते हैं।

अक्सर उन पलकों पर नमी देखी है।
खुशियाँ हैं फिर भी गमी देखी है।
सज संवर के भी उदास दिखते हैं वे।
जिन्होंने मां-बाप की कमी देखी है।
                    ऋतु गोयल

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