Sunday, February 1, 2026

गीत जाग हिंदू जाग

जाग-जाग-जाग रे, अब तो जाग -जाग रे। 
वक्त की पुकार है,निज हितों को त्याग रे।

कब तलक तू आंखें मूंद, स्वप्न देखता रहेगा।
स्वर्ग सी धरा को कोई, शत्रु लूटता रहेगा।
थाम के मशाल भगा,ये तमस के नाग रे।
जाग-जाग-जाग रे....

ये चोट मामूली नहीं,जमीर पे आघात है।
बात ये खुद की नहीं,मां भारती पे बात है।
भारती के शत्रुओं को,गोलियों से दाग़ रे।
जाग-जाग-जाग रे......

सैनिकों की भांति मन में, तू भी तो जुनून रख।
सरहदों पे वे डटे, तू देश में सुकून रख।
छेड़ साज़-साज़ पर, देश का ही राग रे। 
जाग-जाग-जाग रे.....

वसन है अपना केसरी,भगवा हमारी आन है।
ध्वज हमारा केसरी,ये ही हमारी शान है।
न झुका है, न झुकेगा,दिल में रख ये आग रे।
जाग-जाग-जाग रे......

लूट गया जो ये चमन,सिसकेंगी तितलियां सभी।
खू से जो सनी नदी,तड़पेंगी मछलियां सभी।
जाग-जा अब तो बचा,बहनों का सुहाग रे।
जाग-जाग-जाग रे.......
                     ऋतु गोयल

Friday, January 23, 2026

सरस्वती वंदना

हंस वाहिनी,ज्ञान दायिनी,तम हारिणी 
तुमको प्रणाम।
मां सुहासिनी, वीणा वादिनी,वर दायिनी तुमको प्रणाम।

चौसठ कलाओं से सुशोभित कर रही हो ये धरा। 
सप्त सुरों में गूंजती हो जिन स्वरों को तुमने वरा। 
स्वर दायिनी, वीणा वादिनी, वर दायिनी तुमको प्रणाम।

ज्योर्तिमयी तुम ज्ञान से कलुषित मन को पखारती।
एक छंद हो सरस्वती शब्द बाण से तम काटती।
शब्द दायिनी, वीणा वादिनी, वर दायिनी तुमको प्रणाम।

विद्वान के माथे पे तुम तकदीर बन कर शोभती।
जड़मती होते सुजान तुम बंधनों को तोड़ती।
विद्या दायिनी, वीणा वादिनि, वर दायिनी तुमको प्रणाम।

                 ऋतु गोयल